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Sunday, 11 October 2026

भगवान शिव सहज ही प्रसन्न होने वाले देवता : पं. मधुबन

राजेश पाठक, लुधियाना –  न्यू जनता नगर में सप्ताहिक चल रही शिव पुराण कथा में कथा वाचक प मधुबन पाण्डेय जी महाराज ने शिव-भक्ति और शिव-महिमा का विस्तार से वर्णन किया, उन्होने कहा कि लगभग सभी पुराणों में शिव को त्याग, तपस्या, वात्सल्य तथा करुणा की मूर्ति बताया गया है। शिव सहज ही प्रसन्न हो जाने वाले एवं मनोवांछित फल देने वाले देवता हैं। ‘शिव पुराण’ में शिव के जीवन चरित्र पर प्रकाश डालते हुए उनके रहन-सहन, विवाह और उनके पुत्रों की उत्पत्ति के विषय में विशेष रूप से वर्णन किया ।


भगवान शिव सदैव लोकोपकारी और हितकारी हैं। त्रिदेवों में इन्हें संहार का देवता भी माना गया है। शिवोपासना को अत्यन्त सरल माना गया है। अन्य देवताओं की भांति भगवान शिव को सुगंधित पुष्पमालाओं और मीठे पकवानों की आवश्यकता नहीं पड़ती।


शिव तो स्वच्छ जल, बिल्व पत्र, कंटीले और न खाए जाने वाले पौधों के फल धूतरा आदि से ही प्रसन्न हो जाते हैं। शिव को मनोरम वेशभूषा और अलंकारों की आवश्यकता भी नहीं है। वे तो औघड़ बाबा हैं। जटाजूट धारी, गले में लिपटे नाग और रुद्राक्ष की मालाएं, शरीर पर बाघम्बर, चिता की भस्म लगाए एवं हाथ में त्रिशूल पकड़े हुए वे सारे विश्व को अपनी पद्चाप तथा डमरू की कर्णभेदी ध्वनि से नचाते रहते हैं।


इस अवसर पर रमेश चंद्र त्रिपाठी,कपिल तिवारी,मनोज तिवारी,देबीप्रशाद शुक्ला,

संत कुमार पाण्डेय आदि मौजूद थे l


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